Book Foreword: Mahesh Bhatt
फिल्म निर्देशक महेश भट्ट द्वारा दीपक महान की शायरी के बारे में कहना हैः
“शायर की कलम का दायरा उसके दिल की गहराईयों से लेकर दूर दराज़ की दुनिया तक फैला हुआ साफ़ नज़र आता है. मन के मौन और बाज़ार के शोरोगुल की कशमकश से निकली दीपक की गहरी टीस और रूहानी सोच ही उसकी शायरी को अलग पहचान देती है. अवाम के हालात और ज़हन की संजीदगी के संगम से पैदा हुए उसके बेबाक लफ़्ज़ों में वो दर्द, वो छटपटाहट और वो हकीकत मौजूद है जिसे उसने पूरी शिद्दत से जिया है और सहा है. यही वजह है कि बहुत सीधे, साफ़ और सरल लफ़्ज़ों में उन्होनें बहुत गहरी बातें कह दीं हैं.”
