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In quest of Truth, a mind free of
prejudices, a heart full of compassion
and a soul that chimes in
rhythm with mother nature
.

My Rendezvous with King Charles III, then Prince Charles



Jean Luc-Godard: The Fearless Filmmaker Who Defied Diktats Of Commercial Cinema

Godard straying from anthropology to cinema did us good or we would’ve lost a genius storyteller unbound by rules… Continue reading

people’s choice


Yadon Ka Karvan (Hindi Book)

Yadon Ka Karvan (Hindi)

शोहरत की चकाचौंध से परे, फिल्मों के लोकप्रिय सितारे कैसे हँसते और सिसकते हैं, ऐसे अनछुए-अनजाने प्रसंगों का सफर है दीपक महान की “यादों का कारवाँ“।

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कृष्ण जन्माष्टमी विशेष

IPL 2022 Mega Preview: Predictions, squads and analysis

Perspectives


Movie Magic


  • Aadmi (1968)

    Starring Dilip Kumar, Waheeda Rehman, Manoj Kumar, Simi Grewal, and Pran An earlier feature from my columns in Memory of the Great Thespian of Indian Cinema: Dilip Kumar Love triangles have dominated human lives since time immemorial and obviously, Hindi films have been no exception. But “Aadmi” (1968) is perhaps one of the few films … Continue reading Aadmi (1968)


Musings


  • True Wealth

    I am sometimes amazed at people’s desperate attempts to gain riches, power and fame at any cost. While there is nothing wrong with making money, acquiring power or seeking recognition, what galls me is the overriding effort to attain them at the cost of health, happiness, freedom and personal relationships. And I wonder if material … Continue reading True Wealth


टिप्पणी


  • रिश्तों का बाज़ारीकरण

    क्या अजीब समय आया है कि इंसानी भावनाओं से ले कर इंसानी रिश्तों तक, हर चीज़ बिकाऊ हो गयी है. यूँ तो पूरा संसार ही आज एक बड़े से बाज़ार में तब्दील हो गया है पर युग परिवर्तन का खेल देखिये, मंडी में रखी सब्ज़ी-तरकारी की तरह, आजकल मानवीय संवेदनाओं का भी भौंडा प्रदर्शन किया जाता है. … Continue reading रिश्तों का बाज़ारीकरण


Personality

  • माफ़ करना भगत सिंह, हम तेरे हत्यारे हैं

    शादी ना करने की ऐसी अद्भुत दलील, शायद एक बिरला इंसान ही अपनी माँ से कर सकता था और बेशक भगत सिंह इतिहास में अपने तरीके का अनोखा व्यक्तित्व था – निडर, सत्यव्रत, कर्तव्य निष्ठ, निष्काम कर्मयोगी। एक ऐसा योद्धा था जिसका कोई सानी नहीं था और आज 91 साल बाद भी उसकी तरह का … Continue reading माफ़ करना भगत सिंह, हम तेरे हत्यारे हैं

  • जन्मदिन विशेष सस्नेह 

    संसार के अनमोल रत्न: रफ़ी साहब  ये तो सर्वविदित है कि स्वर्गीय मोहम्मद रफ़ी के चाहने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है पर जिस तरह करोड़ों लोग आज भी गायिकी के बादशाह के प्रति प्रेम और सम्मान दर्शाते हैं, वो एक चमत्कार सा लगता है। ये इसलिये क्यूंकि आज जब नामचीन सितारों और नेताओं के लिए … Continue reading जन्मदिन विशेष सस्नेह 

  • Remembering the one and only Nehru

    There is a child in me that misses Nehru Chacha! I saw Pandit Jawaharlal Nehru, the first Prime Minister of India, way back in the early 1960s from the shoulders of my father. The memory of that evening as he spoke to thousands from the canopy of Jaipur Museum is still vivid in my mind … Continue reading Remembering the one and only Nehru

  • सागर सरहदी : बाज़ार से लड़ता सिपाही

    प्रसिद्ध पटकथा और संवाद लेखक सागर सरहदी उन बिरले लोगों में से थे जिन्होनें कभी भी अपनी प्रसिद्धी और पुरुस्कारों को अपने व्यक्तित्व पे हावी नहीं होने दिया और ना ही कभी बाज़ार की ताकतों के आगे झुक कर, अपनी कलम को शर्मिंदा किया. यही वजह है कि तमाम कलाओं के व्यावसायिकरण के बावजूद, “नूरी”, … Continue reading सागर सरहदी : बाज़ार से लड़ता सिपाही

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