शहीदों के साथ गद्दारी
तेईस मार्च की तारीख एक बार फिर आ गई लेकिन किसी चैनल या रेडियो स्टेशन पर से भगत सिंह, राजगुरु या सुखदेव के सम्मान में कोई एक पंक्ति भी श्रद्धांजलि के रूप में प्रसारित नहीं हुई जब की निकृष्ट और लुंज पुंज से नेताओ के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर सारा मीडिया-तंत्र कसीदे पढ़ता रहता है. किसी राजनेता या अभिनेता को भगत सिंह या उसके साथी याद नहीं आये क्योंकि वो शायद बिकने लायक विज्ञापन नहीं हैं और ना ही किसी राजनितिक वोट बैंक का हिस्सा.
