रंगमंच: दीये की लड़ाई तूफ़ान से
रंगमंच में कलाकार की निकटता से दर्शक विभिन्न भावनाओं और घटनाक्रम में भागीदारी बनता है जिससे उसके अवचेतन में समरसता आ जाती है। जीवन के उतार–चढ़ाव का अहसास सिनेमा और टेलीविजन में भी होता है पर वहां वो एक चमत्कारिक तमाशा होता है जबकि रंगमंच पर, सजीव कलाकारों के बीच, दर्शक को सार्थक भाव शुद्धि का अनुभव होता है जिसे दार्शनिक अरस्तू ने ‘कथारसिस‘ का नाम दिया है। यूनानी नाटकों में इसी सजीवता के कारण इसे यूरोप और दुनिया में लोकप्रियता मिली।
