Dharmendra: An Epitome of Simplicity, Handsomeness and Goodness

Dec 08, 1935 – Nov 24, 2025

There will be no Dharmendra again. Unlike many stars of the stellar screen, his compassion was an all-encompassing quality of his presence and since people realised he was an honest man driven by affection and humility, his legacy created a bond with the large number of countrymen.

शहीदों के साथ गद्दारी

तेईस मार्च की तारीख एक बार फिर आ गई लेकिन किसी चैनल या रेडियो स्टेशन पर से भगत सिंह, राजगुरु या सुखदेव के सम्मान में कोई एक पंक्ति भी श्रद्धांजलि के रूप में प्रसारित नहीं हुई जब की निकृष्ट और लुंज पुंज से नेताओ के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर सारा मीडिया-तंत्र कसीदे पढ़ता रहता है. किसी राजनेता या अभिनेता को भगत सिंह या उसके साथी याद नहीं आये क्योंकि वो शायद बिकने लायक विज्ञापन नहीं हैं और ना ही किसी राजनितिक वोट बैंक का हिस्सा.

जन्मदिन विशेष सस्नेह 

संसार के अनमोल रत्न: रफ़ी साहब  ये तो सर्वविदित है कि स्वर्गीय मोहम्मद रफ़ी के चाहने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है पर जिस तरह करोड़ों लोग आज भी गायिकी के बादशाह के प्रति प्रेम और सम्मान दर्शाते हैं, वो एक चमत्कार सा लगता है। ये…

Remembering the one and only Nehru

There is a child in me that misses Nehru Chacha! I saw Pandit Jawaharlal Nehru, the first Prime Minister of India, way back in the early 1960s from the shoulders of my father. The memory of that evening as he spoke to thousands from the…

सागर सरहदी : बाज़ार से लड़ता सिपाही

प्रसिद्ध पटकथा और संवाद लेखक सागर सरहदी उन बिरले लोगों में से थे जिन्होनें कभी भी अपनी प्रसिद्धी और पुरुस्कारों को अपने व्यक्तित्व पे हावी नहीं होने दिया और ना ही कभी बाज़ार की ताकतों के आगे झुक कर, अपनी कलम को शर्मिंदा किया. यही…