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  1. कृष्ण योगेश्वर और सामान्य व्यक्तित्व से परे अवतार पुरुष थे, उस युग पुरुष की समस्त लीला द्वापर के परिवेश से प्रभावित थी, एक सामान्य व्यक्ति की क्षमता उनकी लीला का अंश मात्र भी अपने जीवन में वर्तमान में वैसा ही उतार लेना संभव नहीं, दीपक जी आपका लेख अपने आप मैं सत्य है पर वर्तमान मैं दुस्तर और कठिन प्रक्रिया है, आपकी सोच और लेख के लिए आपको साधुवाद 🙏🙏🙏🕉️

  2. कृष्ण का व्यक्तित्व और कृतित्व अति प्रेरणादायक शब्दों मे व्यक्त किया है कृष्ण का जीवन वल्लभाचार्य ने भी ‘तन -वित्तिय ‘ सेवा हेतु ही माना है, पूज्यनीय नही . विश्लेषण सटीक है… आपका साधुवाद!

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