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  1. इन सभी हालात के अनेक कारणों में से एक कारण “इंटरनेट तक पहुंच ” भी है, हम मानते है कि भारत में कई तथाकथित विकसित और विकासशील देशों से सस्ता और सुलभ इंटरनेट उपलब्ध है लेकिन उसका उपयोग उतनी ही दक्षता से नहीं हो रहा, कई बार लगता है भारत में इंटरनेट का इतना व्यापक स्तर पर उपयोग जल्दबाजी थी या उसके उचित उपयोग के लिए कोई अलग से टोकन/पास/लाइसेंस इत्यादि जारी कर देना चाहिए।
    आज देश में “पैसा+समय+कार्यबल” तीनों का 1% भी सही उपयोग नही होता जो कि भविष्य में समाज के लिए अत्यधिक विभत्सकारी होगा ।

  2. बहुत ही कटु सत्य को रेखांकित किया है आपने। बाज़ार ने आज जीवन के हर पक्ष,हर भावना ,हर संवेदना , हर नाते -रिश्ते को एक वस्तु में बदल दिया है और उसकी एक कीमत तय कर दी है।सभ्यता आज एक अजीब से मुकाम पर आ पहुंची है।मनुष्य समाज की इस स्थिति पर कोई भी चिंता या तकलीफ या विमर्श एक ‘अरण्य-रोदन ‘ है। हम एक हम एक विकराल गति वाले हिंसक समय में जी रहे हैं।

  3. Very well written and extremely thought provoking. The internet has become a new mirror showcasing the hollowness of our relationships…time to ponder, time to improve….

  4. माता पिता ही जब मार्केटिंग का हिस्सा बन जाएं और मुख्य धारा का मिडिया उसे बढ़ चढ़ कर प्रसारित करे और अंधभक्त जनता उस में लिपट कर सोशल मीडिया पर गुणगान करती न थके तो देश की मानसिक कमजोरी का पता चलता है। क्या आप भी माता पिता की सेवा कर उसे प्रचारित करते हैं। फोटो खिंचवाते हैं। अपनी व्यक्तिगत संवेदनाओं का प्रदर्शन करते हैं। क्या यह कॉलगेट वाला प्रचार नहीं है।
    दीपक महान के लेख में रिश्तों, भावनाओं, संवेदनाओं के बाजारीकरण और उसके दोहन पर सटीक लिखा है।

    1. जो लोग एक घर में रह कर सोशल मीडिया पर बधाई देते हैं शायद उनमें बोल चाल बंद हो😀
      प्रदर्शन प्रियता की अति हो गई है। हमारे मन पर अमिट छाप छोड़ने वाली भावपूर्ण,अंतरंग स्मृतियां अक्सर वे होती हैं जिनका कोई चित्र नहीं होता मगर होती हैं अति प्रिय हमारे मन को।
      छिछलों को मुबारक उनके प्रदर्शन,
      भले असल में दिखते हों वे प्रहसन।

    2. दिखावे की संस्कृति ने माँ-बाप के रिश्तों को भी शर्मसार कर दिया है. एक मद में डूबा व्यक्ति ही ऐसी घटिया हरकतें कर सकता है.

  5. Very true in today’s period… social media has captured today’s generation’s mind. Whatsapp…insta….facebook… etc etc… Everyone is busy on them… wishing for functions and occasions on the social media and not personally. This needs to change. Regards…

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